Tuesday, January 22, 2019

क्या जो होता है अच्छे के लिए होता है? | whatever happens, happens for good.

क्या जो होता है अच्छे के लिए होता है?


हम हमेशा यह सुनते रहते हैं कि “जो होता है अच्छे के लिए होता है”। जब किसी के साथ बुरा होता है या उसकी अपेक्षा अनुसार परिणाम नहीं मिलता है, तो हमें यही बात सुनने को मिलती है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वाकई में जो होता है अच्छे के लिए होता है। शायद आपने सोचा होगा या हो सकता है नहीं सोचा हो, यह भी हो सकता है कि आपने कभी ऐसा महसूस किया हो। यदि नहीं सोचा है तो समय में थोड़ा पीछे जाइए और सोचिए कि क्या आपने कभी किसी काम किसी काम से जो अपेक्षा की हो और आपको उसके अनुसार परिणाम ना मिले हो, तब आप हताश हो गए हों। पर कुछ समय बाद आश्चर्यजनक रूप से आपको वो परिणाम प्राप्त हुए जो आपकी अपेक्षा से भी ज्यादा थे। तब आपको अपना वह काम याद आता है, जिसमें आपको इच्छा अनुसार परिणाम ना मिलने पर निराशा हुई थी। अब आप सोचते हैं कि जो हुआ अच्छा हुआ। अगर आपको उस काम से मनचाहे परिणाम मिल जाते तो आपको जो अभी प्राप्त हुआ है वह कभी नहीं मिल पाता।


whatever happens, happens for good 

हमारे साथ अक्सर यही होता है, जो हमें चाहिए होता है वह ना मिलने पर हम निराश हो जाते हैं और यह सोचते हैं कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है। पर यह नहीं सोचते कि हो सकता है हमें इससे भी अच्छी कोई चीज मिलना हो। इसलिए वह नहीं मिला जो हमें चाहिए। मान लीजिए आपको किसी काम से बस या ट्रेन का सफर कर कहीं जाना है। परंतु अंतिम क्षण में आप किसी कारणवश नहीं जा पाते या आपकी बस/ट्रेन छूटने के कारण दूसरी बस/ट्रेन से जाते हैं और आप समय पर ना पहुंचने के कारण निराश हो जाते हैं। अगली सुबह जब आप अखबार पढ़ते हैं, तब आपको मालूम पड़ता है कि जिस बस/ट्रेन से आप पहले जाने वाले थे, उसका एक्सीडेंट हो गया है। अब आप क्या सोचते हैं- अच्छा हुआ जो मेरी बस/ट्रेन छूट गई। अन्यथा यह अखबार अस्पताल मे लेटकर पढ़ रहा होता। इसीलिए कहा गया है जो होता है अच्छे के लिए होता है।

इस पर मुझे एक कहानी याद आती है जो इस प्रकार है-
एक बार शहंशाह अकबर (Akbar) एवं बीरबल (Birbal) शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल ने कहा – “कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है, अच्छे के लिए ही होता है|” अकबर को बीरबल की इस बात पर क्रोध आ गया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बीरबल को महल ले जा कर कारागार में डाल दिया जाए| सैनिकों ने बीरबल को बंधी बना कर कारागार में डाल दिया और अकबर अकेले ही शिकार पर आगे निकल गए| रास्ते में आदिवासियों ने जाल बिछा कर शहंशाह अकबर को बंधी बना लिया और अकबर की बली देने के लिए अपने मुखिया के पास ले गए| जैसे ही मुखिया अकबर की बली चढाने के लिए आगे बढे तो किसी ने देखा कि अकबर की तो अंगुली कटी हुई है, अर्थात् वह खंडित है। इसलिए उसकी बली नहीं दी जा सकती और उन्होंने अकबर को मुक्त कर दिया| अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ एवं वह तुरंत बीरबल के पास पहुँचा| अकबर ने बीरबल को कारागार से मुक्त किया एवं उसने बीरबल से माफ़ी मांगी कि उससे बहुत बड़ी भूल हो गयी, जो उसने बीरबल जैसे ज्ञानी एवं दूरदृष्टि मित्र को बंधी बनाया| बीरबल ने फिर कहा – “जो भी होता है अच्छे के लिए होता है”| तो अकबर ने पूछा कि मेरे द्वारा तुमको बंधी बनाने में क्या अच्छा हुआ है? बीरबल ने कहा, शहंशाह अगर आप मुझे बंधी न बनाते तो मैं आपके साथ शिकार पर चलता और आदिवासी मेरी बली दे देते| इस तरह बीरबल की यह बात सच हुई की जो भी होता है उसका अंतिम परिणाम अच्छा ही होता है।



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